ग्वार व ग्वार गम की कीमत / भाव में एक महीने में 17 % से ज्यादा की वृद्धि

यह वर्ष ग्वार के लिए बहुत ही अच्छा रहा है । मजबूत फंडामेंटल कारकों के कारण ग्वार के भावों को अच्छी सपोर्ट मिल रही है । जनवरी महीने में ग्वार के भाव स्थानीय बाज़ार जोधपुर में में 4000 रुपये प्रति क्विंटल से चढ़ कर 4700 प्रति क्विंटल तक पहुँच गए । कुल मिला के 700 रुपये या 17.5 % बढ़ गए. वहीँ ग्वार गम के भाव 8,500 रुपये प्रति क्विंटल से 10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गए जो की कुल मिला के 1500 रुपये या 17.64 % बढ़ गए ।

तेज़ी अभी बनी हुई है, उम्मीद है की तेज़ी क्रूड आयल में तेज़ी के साथ चलती रहेगी । अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड आयल में तेज़ी बनी हुई है । एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था गोल्डमेन सेस के अनुसार अगले 6 महीनों में क्रूड आयल  के भाव 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच जायेंगे । अगले तीन महीनों में भाव  75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चले जायेंगे । अगर ग्वार को लगातार क्रूड आयल का सहारा मिलता रहा तो  ग्वार के भाव और भी बढ़ेंगे।



वायदा बाज़ार में भी ग्वार के भावों में तेज़ी चल रही है । जानकारों के मुताबिक वायदा बाजार के भाव स्थानीय बाज़ारों में ग्वार की मांग के चलते ही चल रहे है । ग्वार गम बनाने वाली कंपनी भी हाजिर  में माल खरीद रही है । ग्वार की आवक धीर धीरे घाट रही है  वैसे भी अभी का समय बाज़ार में ग्वार की कम आवक का है । उपलब्ध जानकारी के अनुसार आवक घाट कर के 17,000-18,000 बोरी प्रतिदिन तक आ गई है आवक धीरे-धीर और भी कम हो जाएगी ।

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 वृहत स्तर पर ग्वार की व्यवसायिक खेती 
बाजार के जानकारों के अनुसार फ़रवरी महीने के अंत तक ग्वार के भाव स्थानीय बाज़ारों में 5,000 के स्तर को पार कर जायेंगे । ग्वार गम के भाव 11,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुँच जायेंगे । ग्वार का उत्पादन अबकी बार पिछली सालों के तुलना में बहुत ही समिति है । बाजार के जानकार अबकी बार ग्वार का उत्पादन 80,00,000 बोरी (100 किग्रा/प्रति बोरी) के आस पास हुआ है। इतना उत्पादन इस साल की मांग को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त नहीं है. कुछ ग्वार पिछले सालों का भी पड़ा है।  

बाज़ारों में हलचल के अनुसार इस बार ग्वार का भाव 6000 के पार व गम का भाव 15,000 के पार कर जायेगा। अभी देखना पड़ेगा क्या आयल-ड्रिलिंग कंपनी इतना महंगा ग्वार गम खरीदेगी उससे पहले कच्चे तेल की कीमतों में सतत वृद्धि भी बहुत जरूरी है। यंहा ध्यान देने लायक बात ये है की ओपेक देश कब तक अपने उत्पादन को घटायें रखेंगे। मई जून के महीने में मानसून की भविष्यवाणी व जून जुलाई में वास्तविक बारिश व ग्वार की वास्तविक बीजाई ग्वार की कीमतों का स्तर निर्धारण करने का अगला मुख्य कारक होगा।

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