Friday, 6 September 2013

ग्वार फसल के किसानों तथा इससे सम्बंधित व्यापारियों व उधमियों से विनम्र निवेदन

भगवान के आशीर्वाद से आप किसान लोग ग्वार लगाने वाले क्षेत्र से सम्बन्ध रखते है. पिछले २-३ सालों से ग्वार व ग्वार गम के भावों में काफी उत्तार चढ़ाव देखने को मिल रहा है. जिससे किसानो को कुछ समय के लिए फायदा भी हुआ..... लेकिन ज्यादा फायदा नहीं हुवा .....

इस उतार चढ़ाव की स्थिति में किसानो ने ग्वार को अपने घर में भंडारित कर रखा है. कुच्छ किसानो ने तो 2-3 साल का ग्वार भी भंडारित कर रखा है. वैसे तो ये किसानो का अपना निजी मामला है कि वो इसे बेचे या न बेचे.  

लेकिन जब बात ग्वार लगाने वाले  किसानों के समूह की करें तो ये स्थिति चिंता जनक है.

किसान भाइयों ग्वार का उपयोग बहुत सारी इंडस्ट्रियों में होता है. लेकिन जो ये उतार चढ़ाव है वो खनिज तेल व प्राकृत गैस की उत्पादन इकायों की तरफ से है. ग्वार गम के साथ में 60 तरह के ओर भी रसायन काम में आते है.  ग्वार का प्रयोग सस्ता पड़ता था तो इसे काम में लेने लग गए.....

इसी कारण से ग्वार के दामों में चढ़ाव हो गया.   लेकिन साथ में ग्वार दूसरी इंडस्ट्री के पहुँच से दूर हो गया. जो की आने वाले समय के लिए खतरनाक है. इससे किसानो की निर्भरता केवल एक तरह की इंडस्ट्री पर हो गयी.

इसी कारण से सारी की सारी मांग  खनिज तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री  पर निर्भर कर रही है. 

अभी जो 10-15 दिन से भाव चढ़ रहे है उनकी स्थिति भी आपके सामने रख देता हूँ.  ये पूर्णतया सट्टे बजी वाले भाव है. जो इस इंडस्ट्री को लम्बे समय में डूबा के रख देंगे.  इस भाव पर ज्यादा बिज़नस नहीं हो रहा !  

  • आज के दिन खनिज तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री  से कोई भी नयी मांग नहीं है.
  • अमेरिका में सभी खनिज तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री के पास अगले 5-6 महीने का स्टॉक पूरा है 
  • आज के दिन वंहा के आयातकों के पास इंडिया से आधी दरों पर ग्वार गम पड़ा है जो की अगले 1 साल के लिए प्रयाप्त है. 
  • अगर नयी मांग आई भी तो वि अभी बाज़ार में उपलब्ध 5% -10 % ग्वार से पूर्ण हो जायेगी . 
  • व्यापारी भाईयों के पास भी खूब ग्वार का  बीज पड़ा है
  • किसान भाइयों  का तो कहना ही क्या, उन्होंने ने तो अभी पिछले साल का  75% माल स्टोक कर रखा है.
  • उससे पिछले साल का भी 20-25% माल रख रखा है.
  • 2 महीने बाद नयी फसल आने वाली है 
  • भगवान की दया से अभी तक बारिश प्रयाप्त है  लगता है ये फसल अच्छी तरह से हो जाएगी.
  • ग्वार की फसल को जड़ से ज्यादा वातावरण में नमीं चाहिए,वो इस बारिश के मौसम में प्रयाप्त रहती है
  • ग्वार एक कम पानी की फसल है जो अपना काम 1-2 बारिश में निकाल लेती है...
किसान भाइयों अगर ये कृत्रिम कम सप्लाई वाली स्थिति ज्यादा लम्बे समाय तक बनी रही तो  हमे निम्न नुकसान होगें.
  1.  ग्वार के भाव रोजाना उचें नीचे होने से कम्पनीज को रोजाना अपने लाभ हानि की गणना करनी पड़ती है , तथा निवेशकों को जबाब देना पड़ता है 
  2. ग्वार इंडस्ट्री से निवेशकों का भरोसा उठ जायेगा . तथा जल्दी से कोई इस इंडस्ट्री में निवेश नहीं करेगा , जो की लम्बे समय के लिए जरुरी है ताकि इसपे आगे रिसर्च व डेवलपमेंट होती रहे...
  3. तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री ग्वार गम को पूर्ण तया नकार देगी. किसी दुसरे उत्पाद पर चले जाएंगे .  फिर वो ही 1600 -1700 के भाव बाज़ार में रह जायेंगे.
  4. दूसरी इंडस्ट्री ग्वार पर ज्यादा रिसर्च नहीं करेगी व अपने उत्पादों में ग्वार काम में नहीं लेंगे.
  5. ग्वार मेहंगा होनें के कारन दुसरे क्षेत्र के लोग ग्वार लगायेंगे, जीससे आपका एकाधिकार ख़तम होजायेगा, जो की फिर लम्बे समाय के लिए खतरनाक है .
  6. दुसरे देश  अमरीका, ऑस्ट्रेलिया , अफ्रीका के देश , चीन इसकि खेती करने लग जायेंगे तथा इससे भारत की कुल हिस्सेदारी ख़तम हो जाएगी.  
  7. भारत की इंडस्ट्री वाले भी उतार चढ़ाव की स्थिति में व्यापार नहीं कर पाते. उतार चढ़ाव की स्थिति में माल को स्टोक कर नहीं सकते जो की प्रोसेसिंग में आर्डर को जल्दी  पूरा  करने के लिए जरुरी है . 
लम्बे समाय के लाभ को ध्यान में रखते हुए अपने माल को  समय समय पर निकालते रहे. कृत्रिम स्प्लाइ बंद ना करे , कृत्रिम स्थिति हर व्यापार के लिए खतरनाक होती है. निवेसक अपना पैसा दूसरी जगह लगा देगा लेकिन आप को तो ग्वार की खेती करनी पड़ेगी. ज्याद नुकसान बरानी क्षेत्र के किसानों को होगा, क्योने की उनके पास दुसरे विकल्प नहीं है.

 अगर दाम व्यवहारिक रहेंगे तो ज्यादा रिसर्च  होगी, दूसरी नयी इंडस्ट्री भी इसको अपनाना चाहेगी व ग्वार का उपयोग बढेगा. जिससे आपको फायदा होता रहेगा .व्यापारी उधमियों से भी ये ही निवेदन है की इंडस्ट्री की जैविकता बनाये रखे , किसी भी तरह की गलत बात ना फैलाएं.  किसानो को इसके लम्बे समय के लाभ के बारे में बताएं... 

क्यों की ये ठीक उसी तरह की स्थिति है अगर सारी इंडस्ट्री मिल के ग्वार गम लेने से मना कर दे.  

भाषा व वर्तनी की अशुधियों के लिए खेद है..... सुधरवाने का कष्ट करें ...........





5 comments:

  1. whenever these kind of rumour arouses,only poor farmer suffers bcz he dont know whether really dr is demand of it or not..u r the one among those misguider who ruins farmer..there is popular man in sgnr who requested d farmer not to sell dr guar beloe 13000 nd from dt day guar never crossed dt figure..after some days he madr a statement dt font sell it below 11000 nd as usual guar never crossed dt figure..nd nw he again stated not to sell below 8000..so i m worried dt now vl it cross d level or not..so plz dnt misguide d poor farmer..if u dont have d proper knowledge..plz dnt mind..peopke still blame dt trader of ganganager..hope so dt dy vl not blame someone else more..

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    1. What ever the rate or condition. ultimately the farmer has to take the decision. The batter way to take the decision is to calculate the expenses and add his justified margin and sell it. Why do you listen to me? why do you listen to any one? Take your decision himself/yourself.

      I don't know from where the figure of 5000, 8000 ,10000,13000 is derived. The farm expenses are farmer's figure and he can calculate it easily. I am sure that the production cost of guar in Rajasthan is lowest in the world.

      I am not an intelligent person. This is your platform. Keep discussing and share your information and give benefit to other farmers.

      I will more happy to see more discussion instead of more complements by this way the pages can be useful for farmers in decision making.

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  2. माफ़ कीजिएगा ! आप का उपरोक्त लेख पद कर लगता है कि आपकी रूची उत्पादकों से ज्यादा खरीददारों में है , एक तरफ आप कह रहे हैं, कोई खरीदेगा नहीं दूसरी तरफ कह रहे हैं की नए उत्पादक मैदान में आ जायेंगे , फिर कह दिया की थोडा थोडा बेचते रहिये, ये थोड़ा थोड़ा क्यों , जब रेट कम ही होने वाला है

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    1. Dear Godara Ji,

      There are two type of effect of any activity, short term and long term. in the short term the end user will find the intimidate substitute of Guar and in long term they will diversify the supply and R&D on other alternate.

      I am giving you a end use of Guar Gum powder. Please get some empty shampoo bottles to any KABADI ( Scrape collector ) which must be manufactured one year before, you will find guar as an ingredient. if you will find the new batch of same product and brand you will not find guar as ingredient. Future is not in your control nor in my control but it is sure that it will based on today's activities.

      As per loose supply is concern. The loose supply will keep the rates down below economic profitability.

      Activity must not be stopped. It must be keep going slowly and slowly........

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  3. This article is completely biased and has lot of wrong facts. May u please like to share the source from where u got all the figures? A lot of crop has been destroyed and it will further destroy if there will b no rain till september end. It's not only the quantity of rain important, it's timing is equally imp. Area under guar cultivation went up due to rain in July. Crop in the same area will be at the verge due to no rain in sept. Guar demand was moderate last year and it is same this year. When speculators brought down the guar prices from 10000 to 3000 due to large increase in guar cultivation area, industry was happy. Then same logic should be apply if crop is getting destroyed. A Lot of small processing unit came up in 2012. Majority of them did not honour their contract with buyers as the price was jumping everyday and they were moving to new buyer and ditching the older one to make more money. That has lost the buyer's trust and it is completely against the business ethics. The same industry has been exploiting farmers has it ever thought of farmers and try to spend marginal amount of the profit on the R&D of guar to increase its yield. U should not be worried about farmers because they know how to live in abject poverty. They are used to of getting exploited by the industry, it is high time this industry should get mature and come to the terms with ground reality.

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