Tuesday, 24 September 2013

Guargum, seed price surge: FMC set to impose Rs 100-cr penalty on cartel

The Forward Markets Commission (FMC) is set to impose a penalty of Rs 100 crore on a cartel which has been found to be behind the surge in guarseed and guargum prices on futures exchanges to record high last year. Guargum prices had soared to over Rs 1 lakh a quintal and guarseed to over Rs 30,000 in March last year, forcing the commission, which regulates commodities markets in the country, to suspend futures in both.

An official of the FMC said that the Government will be taking action based on a report submitted to the Consumer Affairs Ministry in October last year, on the unusual price movement.

The report had found fault with at least 45 traders.

Responding to question on the report, the official, who did not wish to be identified, said: “The Government is taking action on the report. Notices have been issued and soon, Rs 100 crore penalty will be imposed on the cartel found to be behind this.” The official, however, refused to provide details of the cartel. In May last year, the FMC penalised nine commodity brokerages, including Angel Commodities, Kotak Commodities, Reliance Commodities and Karvy Comtrade, for violating rules in collecting margin money from traders punting on guar gum futures.  Guar or cluster beans, a leguminous crop, is primarily grown in Rajasthan, besides Haryana, Punjab, Gujarat and Madhya Pradesh. Rajasthan accounts for over 70 per cent of the total crop in the country. 

Guarseed is a raw material for producing guar gum.

Guar gum is used as a thickening agent and additive in food products such as instant soups, sauces, processed meat products, baked goods, milk and cheese products, yoghurt and ice-creams. It has industrial applications in the paper and textile sectors, ore flotation, explosives manufacture and fracturing of oil and gas formations.
Currently, guar gum is in demand for fracking of shale gas, particularly in the US that accounts for 25 per cent of the world trade. Guarseed and guar gum prices had run to record high early last year despite the FMC imposing additional margins; investors had to payat least Rs 15 lakh to take positions in guar gum.
Then, investors had justified the surge, pointing out to Government data on exports of guar gum. Initially, the data showed 70 per cent increase in guar gum exports in the first half of 2011-12 fiscal. The data wererevised later by the Government since the industry pointed out that the crop figures and export data of guar gum didn’t match. Meanwhile, prices of guarseed and guar gum which began to rise early this month on reports of dryness in the growing areas have dropped by 25 per cent on Tuesday. This follows the FMC directive to the futures exchanges to scrutinise the sudden spurtfrom August 12.

On Sunday, the FMC Chairman Ramesh Abhishek said on the sidelines of a meet in Mumbai that prices of guarseed and guar gum futures, which resumed in May this year, have begun to drop after he asked the futures exchanges to probe the accounts of their top 25 clients.

“We sought details on hedgers, buyers and sellers in guar (seed and gum) within 15 days. A big cartel seems to be funding the rise through some participants. We have asked exchanges to try and find out the source of funds from these participants. The exchange will penalise the members found guilty,” the chairman said.
Guarseed and guargum futures resumed from May 14, following the commission’s go-ahead.

Guarseed contracts, which are to be delivered in October, opened at Rs 7,730 a quintal on May 14 and dropped to Rs 4,040 on August 12 on speculation that guar production could be a record this year on bountiful monsoon rains. Guar gum contracts for the same month during the same time, dropped to Rs 11,430 a quintal from Rs 24,500.

On September 12, guarseed prices rose to Rs 7,963 and guar gum to Rs 22,380 after which the commission sought details. On Tuesday ( 24/9/2013), guaraseed contracts dropped to Rs 5,990 a quintal and guargum contracts to Rs 16,900.

As on following Link
                     
http://www.thehindubusinessline.com/industry-and-economy/agri-biz/guargum-seed-price-surge-fmc-set-to-impose-rs-100cr-penalty-on-cartel/article5164488.ece?ref=wl_industry-and-economy

Friday, 6 September 2013

ग्वार फसल के किसानों तथा इससे सम्बंधित व्यापारियों व उधमियों से विनम्र निवेदन

भगवान के आशीर्वाद से आप किसान लोग ग्वार लगाने वाले क्षेत्र से सम्बन्ध रखते है. पिछले २-३ सालों से ग्वार व ग्वार गम के भावों में काफी उत्तार चढ़ाव देखने को मिल रहा है. जिससे किसानो को कुछ समय के लिए फायदा भी हुआ..... लेकिन ज्यादा फायदा नहीं हुवा .....

इस उतार चढ़ाव की स्थिति में किसानो ने ग्वार को अपने घर में भंडारित कर रखा है. कुच्छ किसानो ने तो 2-3 साल का ग्वार भी भंडारित कर रखा है. वैसे तो ये किसानो का अपना निजी मामला है कि वो इसे बेचे या न बेचे.  

लेकिन जब बात ग्वार लगाने वाले  किसानों के समूह की करें तो ये स्थिति चिंता जनक है.

किसान भाइयों ग्वार का उपयोग बहुत सारी इंडस्ट्रियों में होता है. लेकिन जो ये उतार चढ़ाव है वो खनिज तेल व प्राकृत गैस की उत्पादन इकायों की तरफ से है. ग्वार गम के साथ में 60 तरह के ओर भी रसायन काम में आते है.  ग्वार का प्रयोग सस्ता पड़ता था तो इसे काम में लेने लग गए.....

इसी कारण से ग्वार के दामों में चढ़ाव हो गया.   लेकिन साथ में ग्वार दूसरी इंडस्ट्री के पहुँच से दूर हो गया. जो की आने वाले समय के लिए खतरनाक है. इससे किसानो की निर्भरता केवल एक तरह की इंडस्ट्री पर हो गयी.

इसी कारण से सारी की सारी मांग  खनिज तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री  पर निर्भर कर रही है. 

अभी जो 10-15 दिन से भाव चढ़ रहे है उनकी स्थिति भी आपके सामने रख देता हूँ.  ये पूर्णतया सट्टे बजी वाले भाव है. जो इस इंडस्ट्री को लम्बे समय में डूबा के रख देंगे.  इस भाव पर ज्यादा बिज़नस नहीं हो रहा !  

  • आज के दिन खनिज तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री  से कोई भी नयी मांग नहीं है.
  • अमेरिका में सभी खनिज तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री के पास अगले 5-6 महीने का स्टॉक पूरा है 
  • आज के दिन वंहा के आयातकों के पास इंडिया से आधी दरों पर ग्वार गम पड़ा है जो की अगले 1 साल के लिए प्रयाप्त है. 
  • अगर नयी मांग आई भी तो वि अभी बाज़ार में उपलब्ध 5% -10 % ग्वार से पूर्ण हो जायेगी . 
  • व्यापारी भाईयों के पास भी खूब ग्वार का  बीज पड़ा है
  • किसान भाइयों  का तो कहना ही क्या, उन्होंने ने तो अभी पिछले साल का  75% माल स्टोक कर रखा है.
  • उससे पिछले साल का भी 20-25% माल रख रखा है.
  • 2 महीने बाद नयी फसल आने वाली है 
  • भगवान की दया से अभी तक बारिश प्रयाप्त है  लगता है ये फसल अच्छी तरह से हो जाएगी.
  • ग्वार की फसल को जड़ से ज्यादा वातावरण में नमीं चाहिए,वो इस बारिश के मौसम में प्रयाप्त रहती है
  • ग्वार एक कम पानी की फसल है जो अपना काम 1-2 बारिश में निकाल लेती है...
किसान भाइयों अगर ये कृत्रिम कम सप्लाई वाली स्थिति ज्यादा लम्बे समाय तक बनी रही तो  हमे निम्न नुकसान होगें.
  1.  ग्वार के भाव रोजाना उचें नीचे होने से कम्पनीज को रोजाना अपने लाभ हानि की गणना करनी पड़ती है , तथा निवेशकों को जबाब देना पड़ता है 
  2. ग्वार इंडस्ट्री से निवेशकों का भरोसा उठ जायेगा . तथा जल्दी से कोई इस इंडस्ट्री में निवेश नहीं करेगा , जो की लम्बे समय के लिए जरुरी है ताकि इसपे आगे रिसर्च व डेवलपमेंट होती रहे...
  3. तेल व प्राकृत गैस इंडस्ट्री ग्वार गम को पूर्ण तया नकार देगी. किसी दुसरे उत्पाद पर चले जाएंगे .  फिर वो ही 1600 -1700 के भाव बाज़ार में रह जायेंगे.
  4. दूसरी इंडस्ट्री ग्वार पर ज्यादा रिसर्च नहीं करेगी व अपने उत्पादों में ग्वार काम में नहीं लेंगे.
  5. ग्वार मेहंगा होनें के कारन दुसरे क्षेत्र के लोग ग्वार लगायेंगे, जीससे आपका एकाधिकार ख़तम होजायेगा, जो की फिर लम्बे समाय के लिए खतरनाक है .
  6. दुसरे देश  अमरीका, ऑस्ट्रेलिया , अफ्रीका के देश , चीन इसकि खेती करने लग जायेंगे तथा इससे भारत की कुल हिस्सेदारी ख़तम हो जाएगी.  
  7. भारत की इंडस्ट्री वाले भी उतार चढ़ाव की स्थिति में व्यापार नहीं कर पाते. उतार चढ़ाव की स्थिति में माल को स्टोक कर नहीं सकते जो की प्रोसेसिंग में आर्डर को जल्दी  पूरा  करने के लिए जरुरी है . 
लम्बे समाय के लाभ को ध्यान में रखते हुए अपने माल को  समय समय पर निकालते रहे. कृत्रिम स्प्लाइ बंद ना करे , कृत्रिम स्थिति हर व्यापार के लिए खतरनाक होती है. निवेसक अपना पैसा दूसरी जगह लगा देगा लेकिन आप को तो ग्वार की खेती करनी पड़ेगी. ज्याद नुकसान बरानी क्षेत्र के किसानों को होगा, क्योने की उनके पास दुसरे विकल्प नहीं है.

 अगर दाम व्यवहारिक रहेंगे तो ज्यादा रिसर्च  होगी, दूसरी नयी इंडस्ट्री भी इसको अपनाना चाहेगी व ग्वार का उपयोग बढेगा. जिससे आपको फायदा होता रहेगा .व्यापारी उधमियों से भी ये ही निवेदन है की इंडस्ट्री की जैविकता बनाये रखे , किसी भी तरह की गलत बात ना फैलाएं.  किसानो को इसके लम्बे समय के लाभ के बारे में बताएं... 

क्यों की ये ठीक उसी तरह की स्थिति है अगर सारी इंडस्ट्री मिल के ग्वार गम लेने से मना कर दे.  

भाषा व वर्तनी की अशुधियों के लिए खेद है..... सुधरवाने का कष्ट करें ...........





Guar gum export falls sharply; basmati, wheat, dairy show rise

The sharp fall in guar gum shipment has pulled down the growth in India's agricultural and processed food exports in the first quarter of 2013-14.

Export of guar gum, used in oil exploration dropped more than 57 per cent, which resulted in a moderate growth in overall agricultural exports during the quarter at around 6 per cent.

Data from the Agricultural and Processed Food Products Exports Development Authority (APEDA) showed that exports of Basmati rice, wheat, fresh vegetables, fruits and meat saw a sharp rise during first quarter. The country's total agricultural exports stood at more that Rs 12 lakh crore during the year 2012-13.

In the first quarter of the current year, the export value of guar gum fell to Rs 4,702 crore from Rs 11,000 crore in the year-ago period. "Due to decline in demand from oil and gas explorers, guar gum exports have declined sharply this years," a commerce ministry official said.

In April-June, 2013, India's agricultural exports from the APEDA basket has grown marginally to Rs 34,132 crore from Rs 32,061 crore in the year-ago period.

Exports of Basmati rice has increased by 67 per cent year-on-year to Rs 11, 178 crore. Realisations from wheat exports posted a 287 per cent rise year-on-year to Rs 3,953 crore during the quarter.

Other commodities which saw an increase include dairy products (Rs 797 crore), pulses (Rs 489 crore), meat (Rs 5087 crore), fresh fruits (Rs 1106 crore) and fresh vegetables (Rs 845 crore).

Source :-

http://www.indianexpress.com/news/guar-gum-export-falls-sharply-basmati-wheat-dairy-show-rise/1165349/

Monday, 2 September 2013

Current price rise of guar seed and gaur gum......Real or Again Speculation

The day before yesterday the guar seed was reached up to the level of 7000/ 100 Kg. I regularly receive the call about the future of guar seed.

To get the answer of your query. Please look at the following updates.
  1. Guar seed sowing is 70 % higher than last year.
  2. The current rainfall is regular and more than average.
  3. There is no news of crop damage due to heavy rain.
  4. The demand of guar powder is closed up to next march
  5. Fresh harvested crop is to be come  after 2 months
None of the above condition is in the favor of  price rise of guar seed . but it has become habit of newspaper and give opinion on rise of  guar seed .

There is one factor which can lead to price rise, that is the going down of value the Rs. because the international trade  is done on USD.  Gum companies are earning more money due to high exchange rates. This is also possible that the rates are gone up just  because of rupees down fall. 

In international market there is no fresh order from fracking industry. It will take time up to next March and April.

So the current rates are speculative only, it is advised to keep away from the market in context to guar seed and guar gum...